गम शायरी 

ग़म छुपाऊं कैसे . ..

खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है,

तेरे ग़म को ज़माने से मैं छुपाऊं कैसे।

देखा गम का साया .. .

जहाँ भी देखा गम का साया,

तू ही तू मुझको याद आया,

ख्वाबों की कलियाँ जब टूटी,

ये गुलशन लगने लगा पराया,

दरिया जब जब दिल से निकला,

एक समंदर आँखों में समाया,

मेरे दामन में कुछ तो देते,

यूँ तो कुछ नहीं माँगा खुदाया।

गमों की ओट में. ..

वफ़ा के शीशमहल में सजा लिया मैनें,

वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैनें,

ये सोच कर कि न हो ताक में ख़ुशी कोई,

गमों की ओट में खुद को छुपा लिया मैनें,

कभी न ख़त्म किया मैंने रोशनी का मुहाज़,

अगर चिराग बुझा तो दिल जला लिया मैनें,

कमाल ये है कि जो दुश्मन पे चलाना था,

वो तीर अपने ही कलेजे पे खा लिया मैनें।

गम ए दुनिया मिली . ..

दुनिया भी मिली गम-ए-दुनिया भी मिली है,

वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था खुदा से।

शबे ग़म काट चुका .. .

आधी से ज्यादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ,

अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बड़ी है।

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