गम शायरी 

बदन में आग सी .. .

बदन में आग सी है चेहरा गुलाब जैसा है,

कि ज़हर-ए-ग़म का नशा भी शराब जैसा है,

इसे कभी कोई देखे कोई पढ़े तो सही,

दिल आइना है तो चेहरा किताब जैसा है।

फ़ासले भी बहुत . ..

ये कैसा सिलसिला है, तेरे और मेरे दरमियाँ,

फ़ासले भी बहुत हैं और मोहब्बत भी।

महफ़िल में हँसना . ..

महफ़िल में हँसना हमारा मिजाज बन गया,

तन्हाई में रोना एक राज बन गया,

दिल के दर्द को चेहरे से जाहिर न होने दिया,

बस यही जिंदगी जीने का अंदाज बन गया।

जब भी करीब . ..

जब भी करीब आता हूँ बताने के किये,

जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये,

महफ़िलों की शान न समझना मुझे,

मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये.

उनके हिस्से का गम . ..

इलाही उनके हिस्से का भी गम मुझको अता कर दे,

कि उन मासूम आंखों में नमी देखी नहीं जाती