गम शायरी 

चाहत तो हर किसी . ..

चाहत तो हर किसी की पूरी नहीं होती,

ग़मों के बिना जिन्दगी आशा नहीं होती,

कुछ लोग तो बीच मे ही साथ छोड़ देते हैं,

पर बिना किसी के ज़िंदगी अधूरी नहीं होती।

चाहा था मुक्कमल हो .. .

चाहा था मुक्कमल हो मेरे गम की कहानी,

मैं लिख ना सका कुछ भी, तेरे नाम से आगे।

कोई गम नहीं. ..

और कोई गम नहीं एक तेरी जुदाई के सिवा,

मेरे हिस्से में क्या आया तन्हाई के सिवा,

यूँ तो मिलन की रातें मिली बेशुमार,

प्यार में सब कुछ मिला शहनाई के सिवा.

राहत मिली ना दिल को. ..

राहत मिली ना दिल को,

ना चैन-ओ-सकून मिला,

बारिस भी होती रही रातभर,

और कमबख्त दिल भी जलता रहा।

गम की कसक . ..

निकल आते हैं आंसू हंसते हंसते

ये किस गम की कसक है हर खुशी में।।

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