इंतजार शायरी 

चांदनी रात बड़ी देर . ..

ये चांदनी रात बड़ी देर के बाद आयी,

ये हसीं मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आयी,

आज आये हैं वो मिलने को बड़ी देर के बाद,

आज की ये रात बड़ी देर के बाद आयी।

इश्क़ की आग मेरे दिल . ..

उस इश्क़ की आग मेरे दिल को आज भी जलाया करती है,

जुदा हुए तो क्या हुआ ये आँख आज भी उनका इंतज़ार करती है।

प्यार कम ना होगा .. .

न देखने से मेरा प्यार कम ना होगा,

तू पलट के ना देख इजहार कम ना होगा,

तुझको देख कर धड़कनें बढ़ जाती है सच है,

लेकिन तेरे लिए मेरे दिल में प्यार कभी कम ना होगा।

तेरे इंतज़ार में शायरी . ..

तुम तारों की तरह रात भर चमकते रहे,

हम चाँद की तरह तन्हा सफ़र करते रहे,

तुम तो बीते वक़्त थे… तुम्हें आना न था,

यूँ ही हम सारी रात करबटें बदलते रहे।

इंतज़ार मरने न दे . ..

किश्तों में खुदकुशी कर रही है ये जिन्दगी…

इंतज़ार तेरा…मुझे पूरा मरने भी नहीं देता ।

इंतजार शायरी 

तुझे देखने को . ..

तू मुझे याद करे न करे तेरी ख़ुशी,

हम तो तुझे याद करते रहते हैं,

तुझे देखने को दिल तरसता रहता है,

और हम इंतज़ार करते रहते हैं।

आँखों में इंतज़ार .. .

उदास आँखों में अपने करार देखा है,

पहली बार उसे बेक़रार देखा है,

जिसे खबर ना होती थी मेरे आने जाने की,

उसकी आँखों में अब इंतज़ार देखा है।

इंतजार उस दिन का .. .

इंतजार तो बस उस दिन का है…

जिस दिन तुम्हारे नाम के पीछे हमारा नाम लगेगा.

रंग तेरे इंतज़ार का .. .

कुछ रोज़ यह भी रंग रहा तेरे इंतज़ार का,

आँख उठ गई जिधर बस उधर देखते रहे।

किन लफ्जों में लिखूँ . ..

किन लफ्जों में लिखूँ मैं अपने इन्तजार को तुम्हें,

बेजुबां है इश्क़ मेरा ढूँढता है खामोशी से तुझे।

इंतजार शायरी 

मिलो उसी तड़प से. ..

लौट आओ और मिलो उसी तड़प से,

अब तो मुझे मेरी वफाओं का सिला दे दो,

इंतजार ख़त्म नहीं होता है आँखों का,

किसी शब् अपनी एक झलक दे दो।

चिराग बुझा दिया .. .

शब-ए-इंतज़ार की कशमकश में

न पूछ कैसे सहर हुई,

कभी एक चिराग जला दिया

कभी एक चिराग बुझा दिया।

एतबार ना करता .. .

वो कह कर गया था कि लौटकर आऊँगा,

मैं इंतजार ना करता तो क्या करता,

वो झूठ भी बोल रहा था बड़े सलीके से,

मैं एतबार ना करता तो क्या क्या करता

कासिद पयामे शौक . ..

कासिद पयामे-शौक को देना बहुत न तूल,

कहना फ़क़त ये उनसे कि आँखें तरस गयीं।

फिर न इंतज़ार. ..

ता फिर न इंतज़ार में नींद आये उम्र भर,

आने का अहद कर गये आये जो ख्वाब में।

इंतजार शायरी 

किसका मुझे इंतज़ार. ..

मुद्दत से ख्वाब में भी नहीं नींद का ख्याल,

हैरत में हूँ ये किस का मुझे इंतज़ार है।

देर लगी आने में. ..

देर लगी आने में तुमको,

शुक्र है फिर भी आये तो,

आस ने दिल का साथ न छोड़ा,

वैसे हम घबराये तो।

तेरे इंतजार में.. .

तेरे इंतजार में कब से उदास बैठे हैं,

तेरे दीदार में आँखे बिछाये बैठे हैं,

तू एक नज़र हम को देख ले बस,

इस आस में कब से बेकरार बैठे हैं।

इंतज़ार सहर का. ..

ये इंतज़ार सहर का था या तुम्हारा था,

दिया जलाया भी मैंने दिया बुझाया भी।

आते नहीं आने वाले .. .

दिल जलाओ या दिए आँखों के दरवाज़े पर,

वक़्त से पहले तो आते नहीं आने वाले।

प्रेरक शायरी

जिंदगी तुझसे हर कदम .. .

जिंदगी तुझसे हर कदम पर समझौता क्यों किया जाय,

शौक जीने का है मगर इतना भी नहीं कि मर मर कर जिया जाए।

जब जलेबी की तरह उलझ ही रही है तू ऐ जिंदगी,

तो फिर क्यों न तुझे चाशनी में डुबा कर मजा ही लिया जाए।

अंधेरों में मंजिल शायरी .. .

जब टूटने लगे हौसले तो बस ये याद रखना,

बिना मेहनत के हासिल तख्तो ताज नहीं होते,

ढूंढ़ लेना अंधेरों में मंजिल अपनी,

जुगनू कभी रौशनी के मोहताज़ नहीं होते।

डर मुझे भी लगा .. .

डर मुझे भी लगा फांसला देख कर,

पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर,

खुद ब खुद मेरे नज़दीक आती गई,

मेरी मंज़िल मेरा हौंसला देख कर ।

प्रेरक शायरी

सूरज बन कोई. ..

खुद को जला दे तभी रोशनी मिलेगी तुझे

वरना क्या पता इन अन्धेरो में रक्खा क्या है़?

तू हंसे तो दुनिया हंसे,

वरना अकेले मुस्कुराने में रक्खा क्या है?

बनना है तो सूरज बन कोई और

सितारा बनने में रक्खा क्या है…।

उम्मीद जिन्दा रख. ..

ज़मीर ज़िंदा रख,

कबीर ज़िंदा रख,

सुल्तान भी बन जाए तो,

दिल में फ़क़ीर ज़िंदा रख,

हौसले के तरकश में,

कोशिश का वो तीर ज़िंदा रख,

हार जा चाहे जिन्दगी मे सब कुछ,

मगर फिर से जीतने की वो उम्मीद जिन्दा रख,

बहना हो तो बेशक बह जा,

मगर सागर मे मिलने की वो चाह जिन्दा रख,

मिटता हो तो आज मिट जा इंसान,

मगर मिटने के बाद भी इंसानियत जिन्दा रख।

प्रेरक शायरी

पीर पर्वत सी . ..

​​​हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए,

इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए​।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी​,

शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए​।

हर सड़क पर हर गली में हर नगर हर गाँव में​,

हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए​।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं​,

सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए​।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही​,

हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए​।

मुझे नाकाम होने दो . ..

अभी सूरज नहीं डूबा ज़रा सी शाम होने दो,

मैं खुद लौट जाऊँगा मुझे नाकाम तो होने दो,

मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना,

मैं खुद हो जाऊँगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो।