गम शायरी 

मेरे गम के किस्से .. .

किसे सुनाएँ अपने गम के

चन्द पन्नो के किस्से…

यहाँ तो हर शख्स

भरी किताब लिए बैठा है l

गम है हर एक को. ..

गम तो है हर एक को,

मगर हौंसला है जुदा- जुदा,

कोई टूट कर बिखर गया,

कोई मुस्कुरा के चल दिया ।

शायरों की बस्ती में. ..

शायरों की बस्ती में कदम रखा तो जाना,

गमों की महफिल भी कमाल जमती है।

मेरे ग़म ने होश .. .

मेरे ग़म ने होश उनके भी खो दिए…

वो समझाते समझाते खुद ही रो दिए।

वो सूरज की तरह . ..

वो सूरज की तरह आग उगलते रहे,

हम मुसाफिर सफ़र पे ही चलते रहे,

वो बीते वक़्त थे, उन्हें आना न था,

हम सारी रात करवट बदलते रहे।

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गम शायरी 

चाहत तो हर किसी . ..

चाहत तो हर किसी की पूरी नहीं होती,

ग़मों के बिना जिन्दगी आशा नहीं होती,

कुछ लोग तो बीच मे ही साथ छोड़ देते हैं,

पर बिना किसी के ज़िंदगी अधूरी नहीं होती।

चाहा था मुक्कमल हो .. .

चाहा था मुक्कमल हो मेरे गम की कहानी,

मैं लिख ना सका कुछ भी, तेरे नाम से आगे।

कोई गम नहीं. ..

और कोई गम नहीं एक तेरी जुदाई के सिवा,

मेरे हिस्से में क्या आया तन्हाई के सिवा,

यूँ तो मिलन की रातें मिली बेशुमार,

प्यार में सब कुछ मिला शहनाई के सिवा.

राहत मिली ना दिल को. ..

राहत मिली ना दिल को,

ना चैन-ओ-सकून मिला,

बारिस भी होती रही रातभर,

और कमबख्त दिल भी जलता रहा।

गम की कसक . ..

निकल आते हैं आंसू हंसते हंसते

ये किस गम की कसक है हर खुशी में।।

गम शायरी 

बदन में आग सी .. .

बदन में आग सी है चेहरा गुलाब जैसा है,

कि ज़हर-ए-ग़म का नशा भी शराब जैसा है,

इसे कभी कोई देखे कोई पढ़े तो सही,

दिल आइना है तो चेहरा किताब जैसा है।

फ़ासले भी बहुत . ..

ये कैसा सिलसिला है, तेरे और मेरे दरमियाँ,

फ़ासले भी बहुत हैं और मोहब्बत भी।

महफ़िल में हँसना . ..

महफ़िल में हँसना हमारा मिजाज बन गया,

तन्हाई में रोना एक राज बन गया,

दिल के दर्द को चेहरे से जाहिर न होने दिया,

बस यही जिंदगी जीने का अंदाज बन गया।

जब भी करीब . ..

जब भी करीब आता हूँ बताने के किये,

जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये,

महफ़िलों की शान न समझना मुझे,

मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये.

उनके हिस्से का गम . ..

इलाही उनके हिस्से का भी गम मुझको अता कर दे,

कि उन मासूम आंखों में नमी देखी नहीं जाती

गम शायरी 

ग़म छुपाऊं कैसे . ..

खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है,

तेरे ग़म को ज़माने से मैं छुपाऊं कैसे।

देखा गम का साया .. .

जहाँ भी देखा गम का साया,

तू ही तू मुझको याद आया,

ख्वाबों की कलियाँ जब टूटी,

ये गुलशन लगने लगा पराया,

दरिया जब जब दिल से निकला,

एक समंदर आँखों में समाया,

मेरे दामन में कुछ तो देते,

यूँ तो कुछ नहीं माँगा खुदाया।

गमों की ओट में. ..

वफ़ा के शीशमहल में सजा लिया मैनें,

वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैनें,

ये सोच कर कि न हो ताक में ख़ुशी कोई,

गमों की ओट में खुद को छुपा लिया मैनें,

कभी न ख़त्म किया मैंने रोशनी का मुहाज़,

अगर चिराग बुझा तो दिल जला लिया मैनें,

कमाल ये है कि जो दुश्मन पे चलाना था,

वो तीर अपने ही कलेजे पे खा लिया मैनें।

गम ए दुनिया मिली . ..

दुनिया भी मिली गम-ए-दुनिया भी मिली है,

वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था खुदा से।

शबे ग़म काट चुका .. .

आधी से ज्यादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ,

अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बड़ी है।

गम शायरी 

दुनिया के रंग . ..

क्या खूब दिखाया दुनिया ने अपना रंग,

हम रंग भरते भरते खुद बे-रंग हो गए।

हम तरसते रहेंगे . ..

उनकी एक नज़र को हम तरसते रहेंगे,

ग़म के आँसू हर पल यूँ ही बरसते रहेंगे,

कभी बीते थे कुछ पल उनके साथ,

बस यही सोच कर हम हँसते रहेंगे।

तेरे जाने के बाद. ..

एक तेरे चले जाने के बाद से हमें,

किसी का भी यहाँ ऐतबार न रहा,

और किसी से तो क्या करेंगे मोहब्बत,

जब अपनी ही जिंदगी से प्यार न रहा।

ग़म दिल में है .. .

क्या जाने किसको किससे है

अब दाद की तलब,

वह ग़म जो मेरे दिल में है

तेरी नज़र में है।

गम की आतिशबाजी . ..

फिर तेरा चर्चा हुआ, आँखें हमारी नम हुई,

धड़कनें फिर बढ़ गई, साँस फिर बेदम हुई,

चाँदनी की रात थी, तारों का पहरा भी था,

इसीलिये शायद गम की आतिशबाजी कम हुई।