गम शायरी 

मेरे गम के किस्से .. .

किसे सुनाएँ अपने गम के

चन्द पन्नो के किस्से…

यहाँ तो हर शख्स

भरी किताब लिए बैठा है l

गम है हर एक को. ..

गम तो है हर एक को,

मगर हौंसला है जुदा- जुदा,

कोई टूट कर बिखर गया,

कोई मुस्कुरा के चल दिया ।

शायरों की बस्ती में. ..

शायरों की बस्ती में कदम रखा तो जाना,

गमों की महफिल भी कमाल जमती है।

मेरे ग़म ने होश .. .

मेरे ग़म ने होश उनके भी खो दिए…

वो समझाते समझाते खुद ही रो दिए।

वो सूरज की तरह . ..

वो सूरज की तरह आग उगलते रहे,

हम मुसाफिर सफ़र पे ही चलते रहे,

वो बीते वक़्त थे, उन्हें आना न था,

हम सारी रात करवट बदलते रहे।